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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में लेक्स फ्रिडमैन के पॉडकास्ट में एक दिलचस्प किस्सा सुनाया, जो उनके बचपन और साधारण जीवनशैली को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि कैसे उनके बचपन में जूतों की आवाज से समय का अंदाजा लगाया जाता था। यह किस्सा उनकी सादगी और गरीबी में पले-बढ़े होने की झलक देता है।
पीएम मोदी का किस्सा:
पीएम मोदी ने बताया कि उनके बचपन में घर में घड़ी नहीं हुआ करती थी। उस समय समय का अंदाजा लगाने के लिए वे और उनके परिवार के लोग जूतों की आवाज का इस्तेमाल करते थे। उन्होंने समझाया कि जब सुबह होती थी, तो लोग काम पर जाने के लिए जूते पहनते थे। जूतों की आवाज से ही उन्हें पता चल जाता था कि सुबह हो गई है और उठने का समय हो गया है।

किस्से का संदर्भ:
- सादगी और संघर्ष: यह किस्सा पीएम मोदी के साधारण और संघर्षपूर्ण बचपन को दर्शाता है। उनका परिवार आर्थिक रूप से संघर्ष कर रहा था, और घड़ी जैसी बुनियादी चीज भी उनके पास नहीं थी।
- जीवन में अनुशासन: इस किस्से से यह भी पता चलता है कि पीएम मोदी ने बचपन से ही अनुशासन और समय के महत्व को समझ लिया था। जूतों की आवाज से समय का अंदाजा लगाना उनकी सूझ-बूझ और जीवन के प्रति गंभीरता को दर्शाता है।
- प्रेरणादायक संदेश: यह किस्सा यह संदेश देता है कि संसाधनों की कमी भी व्यक्ति को रचनात्मक बना सकती है। पीएम मोदी ने अपने जीवन में इस सीख को आगे बढ़ाया और एक सफल नेता बने।

निष्कर्ष:
पीएम मोदी का यह किस्सा न केवल उनकी सादगी और संघर्ष को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि कैसे छोटी-छोटी चीजों से भी जीवन में बड़े सबक सीखे जा सकते हैं। यह किस्सा उनके व्यक्तित्व की गहराई और जीवन के प्रति उनके दृष्टिकोण को समझने में मदद करता है।
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